Wednesday, 11 March 2015

कानो में है गूंजती दिन रात तेरी सदा...

कानों में है गूंजती दिन-रात यूं तेरी सदा,
सुन नहीं पाया दुनिया से आती हुई कोई हवा,

दिल के हर जज़्बात से गम आशना है इस कदर,
दर्द ही देता है मुझको मुस्कुराने की दवा,

बेवफा है दुनिया में सजता हुआ हर आईना,
जो उस चमक में खो गए वो भूल गए अपनी वफा,

हो गया आसान कितना जीना अब तन्हाई में,
मुश्किल में थी जब जिंदगी वो कह गए अलविदा,

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