मैं खुद को खुद से ही बहुत दूर कर दूंगी,
अपने आप को गमों से ऐसे चूर कर दूंगी,
.
कि गर देंगे मेरे अपने मुझको आँसू यहाँ,तो,
आँखों को उन्हें पीने पर मजबूर कर दूंगी,
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देगा अगर ज़माना मुझे ढेरों जख्म तो क्या,
मैं अपने घावों को खुद ही नासूर कर दूंगी,
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हँसेंगे दुनिया वाले मुझको रुला के तो बहुत,
लेकिन"मैं खुश हूँ"ये बात मैं मशहूर कर दूंगी,
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गर हो गए हो मगरूर मेरे दिल को तोड़ कर,
तो हँस कर उस गुरूर को चूर-चूर कर दूंगी,
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खुदा ने रखा गर मुझे प्यार से महरूम यहाँ,
तो मैं भी उसकी इस दुनिया को बेनूर कर दूंगी,
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मैं खुद को खुद से ही बहुत दूर कर दूंगी,
अपने आप को गमों से इस कदर चूर कर दूंगी.....
दोस्तो.. मैं "अमित कुमार" आपका दोस्त.. अपने पेज पे आप सभी का स्वागत करता हूँ.. मेरा पेज शायरी ओर दुनिया की कुछ वास्तविक स्च्चाईओं को समर्पित है.. प्यार कभी ना कभी सभी की जिंदगी मे आता है .. आपकी जिंदगी मे भी शायद आया होगा.. किसी को मिलता है .. ओर किसी को नही मिलता... बस यादें सभी को मिल जाती है .. इन यादों को संजोने का पर्यास करने के लिए आप सब के बीच आया हूँ.. आशा करता हूँ की आप मेरे पेज को पसंद करेंगे . अपने विचार मुझे भेजते रहें.. . आपका प्यार मिलता रहे बस दोस्तो...
Thursday, 12 March 2015
मैं खुद को खुद से ही बहुत दूर कर दूंगी...
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