Monday, 9 March 2015

वक़्त हो तुम लम्हा हूँ में

कब तक न होने दोगे शरीक खुद में

मेरा वजूद तू मेरी हयात है तू

सागर हो तुम तो दरिया हूँ मैं

मुझे खो ही जाना है तुझमे मगर

मेरा सबूत है तू मेरी जात है तू


आवाज़ हो तुम तो इक गूंज हूँ में


आजमाएगा कौन तेरे बगैर मुझे


तब तक हूँ मैं जब तक मेरे साथ है तू


तू क्या नहीं मैं कुछ नहीं


तू है हर कंही मैं कंही नहीं


मुकमल है तू मैं हूँ नहीं


खुदा है ख्याल है


खूब है कमाल है


अजीज है बेमिसाल है


रुंह है रवानी है


मेहर है की मेहरबानी है


जो भी है मेरे हमनशी


तेरे है कागज़ कलम ख्याल


और मेरी कहानी है......
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