Monday, 9 March 2015

क्या मिला है मुझे इस दिल के आईने के सिवा

क्या हुआ है मेरा गिर-गिर के टूटने के सिवा

देर हो जाएगी तुमको भी घर जाने तलक


तुमने भी सीखा है क्या मुसीबत उठाने के सिवा

दर्द कितना भी जहर उगले आंखों से मगर


हमको कुछ आया नहीं जख्म पे रोने के सिवा

आप आ ही गए आशिक का जनाजा ढोने

आप अपने हैं, क्या देंगे हमें कांधे के सिवा

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